Sunday, May 10, 2020

पिता की मेरे ये बात निराली!
















जग ने है यह बात ना जानी 
किस्मत थी जब मेरी खाली
फूल को सींचा खुद बन माली
पिता की मेरे ये बात निराली!

माँ ने मुझको संस्कार सिखाये
पिता ने अपने फ़र्ज़ निभाए
दोनों के त्याग की है ये कहानी
पिता की मेरे ये बात निराली!

सच्ची निष्ठा मेहनत से
त्याग बलिदान और हिम्मत से
अपने कर्म को पूजा मान
कर दिया यह जीवन देश के नाम
पिता की मेरे ये बात निराली!

जीवन में सिर्फ प्यार करो
बार बार बस यही फ़रमाया है
ज्ञान के रूप में सबसे पहले
मुझको यही सिखाया है
पिता की मेरे ये बात निराली!

2 comments:

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